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फैज़ाने फ़ारुके आज़म र०अ०

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 जब उमर फ़ारूक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ  मुसलमान हुए नमाज़ का वक़्त हुआ तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:                  "सहाबा तैयारी करो नमाज़ की-" उमर फारूक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने कहा:                  "हुज़ूर नमाज़ कहां पढ़ेंगे ?" आक़ा करीम ﷺ ने फ़रमाया:                  "किसी कोने में छुप के पढ़ते हैं-" उमर फारूक़ ने कहा:                  "हुज़ूर आपके क़दमों पे मेरे मां बाप क़ुर्बान अगर अब भी छुप कर नमाज़ पढ़ें तो उमर के मुसलमान होने का क्या फायदा ?" उमर फारूक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने कहा:                  "हुज़ूर आज नमाज़ काबातुल्लाह में पढ़ेंगे-" हुज़ूर ने फ़रमाया:                  "उमर कुफ्फार का बड़ा गलबा है-" वाह मेरे खुदा उमर फारूक़ घोड़े पे सवार हुए मक्के के चौकों पे जाकर गलिय...

मदीने के फूल

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गुमराही की सर जमीन पर किसी को हिदायत देना सदका है ।।            

Madani Phool Mahe safarul muzaffar

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28 सफर शहादत इमाम हसन मुज्तबा علیہ السلام

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28 सफर शहादत इमाम हसन मुज्तबा علیہ السلام  इमाम हसन मुज्तबा علیہ السلام ने फ़रमाया:            "तीन खसलतें हैं जो इंसान की हलाकत और नाबूदी  का सबब हैं..... "तकब्बुर" "लालच" और "हसद" तकब्बुर:        "दीन की नाबूदी का सबब है और तकब्बुर की वजह से ही शैतान मलऊन क़रार पाया-" लालच:         "ये इंसान की जान का दुश्मन है और इसी लालच की वजह से ही,आदम को बहिश्त से निकाल दिया गया-" हसद:        "ये तमाम बुराइयों का रहनुमा है, और इसी हसद की वजह से क़ाबील ने हाबील को क़त्ल कर दिया-" 📝 Muhammad Imtiyaz Rabbani

इबादत करने के चार तरीक़े हो सकते हैं. मसलन

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इबादत करने के चार तरीक़े हो सकते हैं. मसलन हाथ बाँध कर खड़े हो जाना दो ज़ानू बैठ जाना रूकू करना (कमर और सर झुका देना ) सजदा करना (माथा टेकना) हिन्दू मज़हब में अपने खुदा के सामने हाथ बाँध कर खड़े होने का रिवाज है. सिख माथा टेकते हैं. ईसाई दो ज़ानू बैठते हैं यहूदियों की इबादत में रुकू शामिल है.  इनके अलावा पांचवां कोई और तरीक़ा इबादत का नहीं हो सकता. इस्लामी इबादत सलात (नमाज़) में ये चारों चीज़ें शामिल हैं. यानी एक मुकम्मल इबादत जिसमें बंदगी के तमाम आदाब शामिल हैं और बंदा ख़ुद को पूरी तरह से अपने पालनहार के सुपुर्द कर देता है. एक चीज और है वो ये कि इस्लाम में इबादत  दिन में पांच बार फ़र्ज़ है. इस से अपने रब की बड़ाई, उसकी याद और उसकी अज़्मत दिलों में ताज़ा रहती है. जिस से तबीयत में एक क़िस्म की रूहानियत रहती है और जो दिलों को फरहत अता करती है. बाक़ी जो इसके और फ़ायदे हैं वो सलात अदा करने वालों पर वाज़ेह हैं. واقیمو الصلوٰۃ

चुगलखोरी किसे कहते हैं

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चुगलखोरी किसे कहते हैं चुगली :- या'नी किसी की बात सुन कर किसी दूसरे से इस तौर पर कह देना कि दोनों में इख़्तिलाफ़ और झगड़ा हो जाए। येह बहुत बड़ा गुनाह और बहुत खराब आदत है। तजरिबा है कि मर्दों से जियादा औरतें इस गुनाह में मुब्तला हैं। हदीष शरीफ़ में चुगल खोरी को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने गुनाहे कबीरा बताया यहां तक कि एक हदीष में येह आया है कि चुगुल खोर जन्नत में नहीं दाखिल होगा। ( मुस्लिम शरीफ किताब उल ईमान जिल्द 1 पेज नंबर 66) और एक हदीष में येह भी है कि तुम लोगों में सब से जियादा खुदा के नजदीक ना पसन्दीदा वोह है जो इधर उधर की बातों में लगाई बुझाई कर के मुसलमान भाइयों में इख़्तिलाफ़ और फूट डालता है। ( अल मुसनद इमाम अहमद बिन हंबल 291) और एक हदीष में येह भी फ़रमाने रसूल है कि चुगल खोर के आखिरत से पहले उस की कबर में अज़ाब दिया जाएगा। ( बुखारी शरीफ जिल्द 1 पैज 95) इस के इलावा चुगूली की बुराई के बारे में बहुत सी हदीष आई है। मुसलमान भाइयो और बहनो ! किसी की कोई बात सुनो तो खूब समझ लो कि तुम इस बात के अमीन हो गए अगर दूसरों तक इस बात ...

इमाम की जनाब में कुफियो की दरख्वास्ते

सवानहे कर्बला​​ Part #06 ​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​ ​اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ​ इमाम की जनाब में कुफियो की दरख्वास्ते​   Part#02      अगर्चे इमामे हुसैनرضي الله تعالي عنه की शहादत की खबर मसहूर थी और कुफियो की बे वफाई का पहले भी तजिरबा हो चूका था मगर जब यज़ीद बादशाह बन गया और उस की हुकूमत व सल्तनत दिन के लिये खतरा थी और इस वजह से उस की बैअत न रवा थी और वो तरह तरह की तदबिरो और हिलो से चाहता था की लोग उस की बैअत करे।      इन हालात में कुफियो का बपासे मिल्लत यज़ीद की बैअत से दस्तकशि करना और हज़रते इमामرضي الله تعالي عنه से तालिबे बैअत होना इमाम पर लाज़िम करता था इन की दरख्वास्त क़बूल फरमाए जब एक क़ौम ज़ालिम व फ़ासिक़ की बैअत पर राज़ी न हो और साहिबे इस्तिहक़ाक़ अहल से दरख्वास्ते बैअत करे इस पर अगर वो इनकी इस्तीदआ क़बूल न करे तो इस के ये माना होते है की वो इस क़ौम को इस जाबिर ही के हवाले करना चाहता है।      इमामे हुसैनرضي الله تعالي عنه अगर उस वक़्त कुफियो की दरख्वास्त क़बूल न फरमाते तो बारगाह...