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नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया

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🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 🌺नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: मैं तीन बातों पर क़सम खाता हूँ और मैं तुम लोगों से एक बात बयान कर रहा हूँ जिसे याद रखो, 1⃣किसी बंदे के माल में सदक़ा देने से कोई कमी नहीं आती ( ये पहली बात है ), 2⃣और किसी बंदे पर किसी किस्म का ज़ुल्म हो और इस पर वो सब्र करे तो अल्लाह उस की इज़्ज़त को बढ़ा देता है ( दूसरी बात है ), 3⃣और अगर कोई शख़्स दुसरों के आगे हाथ फैलाए तो अल्लाह उसके लिए फक्र (फ़कीरी) और मोहताजी का दरवाज़ा खोल देता है। 🌺نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا، ”میں تین باتوں پر قسم کھاتا ہوں اور میں تم لوگوں سے ایک بات بیان کر رہا ہوں جسے یاد رکھو“،  1⃣”کسی بندے کے مال میں صدقہ دینے سے کوئی کمی نہیں آتی ( یہ پہلی بات ہے ) ،  2⃣اور کسی بندے پر کسی قسم کا ظلم ہو اور اس پر وہ صبر کرے تو اللہ اس کی عزت کو بڑھا دیتا ہے ( دوسری بات ہے ) ،  3⃣اور اگر کوئی شخص دوسروں کے اگے ہاتھ پھیلائے تو اللہ اس کے لیے فقر (فقیری) و محتاجی کا دروازہ کھول دیتا ہے“۔ *📚Jamiat Tirmidhi: Hadith no. 2325*

हदीस शरीफ की रोशनी

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☪🌴हदीस शरीफ की रोशनी🌴☪ 💠सदा सच्चाई पे जिंदगी बसर करो💠 @arzooemadina हजरत हसन बिन अली (रदी अल्लाह अन्हु) फरमाते हैं कि मुझे हुजूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैही वस्सलम) का यह फरमान (आज भी) याद है,आप सरकार सल्लल्लाहु अलयहे वसल्लम ने फरमाया,  शक व शुब्हा वाली चीज़ से बचकर रहो ओर हमेशा 'शक' व 'शुब्हे' से पाक चीज़ को ही इख्तियार करो ओर बेशक 'सच्च' सुकुन है ओर 'जूठ' शक व शुब्हा है !     🌻(तिरमिजी शरीफ:  2518 )🌻

Raushan Khayalaat

Raushan Khayalaat ▪Imaan Ke Baad Afzal Tareen Neki Qalq E Khuda Ko Aaraam Pahunchana Hai. (Huzoor E Akram Sallallahu Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam)                                        ☆ ▪Jo Zulm Karke Izzat Chahta Hai, Allah Use Insaaf Karke Zaleel Karta Hai. (Hazrat E Ali KaramAllahu Wajhul Karim)                                        ☆ ▪Aqalmand Baat Karne Se Pehle Dimaagh Se Puchta Hai, Phirr Munh Se Bolta Hai. (Hazrat Ghouse E Aazam Rehmatullahi Alayh)                      ...

हलाल तरीके से कमाने के 50 मदनी फूल

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लुक्मए हलाल की फजीलत   بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ      हमें हमेशा हलाल रोज़ी कमाना, खाना और खिलाना चाहिये। लुक्मए हलाल की तो क्या ही बात है चुनान्चे दावते इस्लामी के इशाअती इदारे मक-त-बतुल मदीना की मत्बूआ 1548 सफ़हात पर मुश्तमिल किताब, फैजाने सुन्नत जिल्द अव्वल सफहा 179 पर है:  हज़रते सय्यदुना इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली رحمتُ اﷲِ تعَالٰی علَيه एहृयाउल उलूम की दूसरी जिल्द में एक बुजुर्ग رحمتُ اﷲِ تعَالٰی علَيه का कौल नक्ल  करते हैं कि मुसल्मान जब हलाल खाने का पहला लुक्मा खाता ई है, उस के पहले के गुनाह मुआफ कर दिये जाते हैं। और जो शख्स तलबे हलाल के लिये रुस्वाई के मकाम पर जाता है उस के गुनाह दरख्त के पत्तों की तरह झड़ते हैं। बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله ✍🏼हलाल तरीके से कमाने के 50 मदनी फूल  पेज 3 ●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

हलाल तरीके से कमाने के 50 मदनी फूल

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हलाल रोजी के बारे में 5 फ़रामीने मुस्तफा ﷺ   بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ 1) सब से ज़ियादा पाकीज़ा खाना वोह है जो अपनी कमाई से खाओ 2) बेशक अल्लाह तआला मुसल्मान पेशावर को दोस्त रखता है। 3) जिसे मज़दूरी से थक कर शाम आए उस की वोह शाम , शामे मग्फिरत हो। 4) पाक कमाई वाले के लिये जन्नत है। 5) कुछ गुनाह ऐसे हैं जिन का कफ्फारा न नमाज़ हो न रोज़े न हज न उम्रह। उन का कफ्फारा वोह परेशानियां होती हैं जो आदमी को तलाशे मआशे हलाल में पहुंचती हैं। बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله ✍🏼हलाल तरीके से कमाने के 50 मदनी 3

Islamic Quotes Life Changing Thought

-:: अनमोल मोती-5 ::- `` (1)-अपनी ज़ुबान की हिफाज़त करने वाला कभी रुसवा नहीं होता. `` (2)-इल्म और तालीम से बेहतर व् किमती चीज़ कोई नहीं है. `` (3)-मोहब्बत को मज़बूत बनाना चाहते हो तो आपस मे मिलते रहो. और अगर बहुत ही मज़बूत बनाना चाहते हो तो बार-बार नहीं बल्कि कभी-कभी मिला करो. `` (4)-मुसीबतो का मुकाबला सब्र से करो और नेअमतों की हिफाज़त शुक्र से  करो. `` (5)-नसीहत की बात चाहे कड़वी हो क़ुबूल कर लिया करो. `` (6)-दोस्त का तोहफा चाहे मामूली हो क़ुबूल कर लिया करो. `` (7)-गरीब की दावत चाहे तकलीफ देनेवाली हो, फिर भी क़ुबूल कर लिया करो. `` (8)-तन्हाइ मे भी अल्लाह तआला की मुखालिफत (विरोध) करने डरो, क्यों  की जो गवाह है वही हाकिम है. `` (9)-आग और पानी दोनों हमारी ज़िंदगी के लिए ज़रूरी और बहुत ही अहम है.  मगर यही दो चीज़े जब खौफनाक बन जाती है तो बेहद नुकशान पहुचती है. `` (10)-अगर तुम चाहते हो के तुम्हारी रोज़ी और उम्र मे बरकत हो तो तुम्हारे लिए ज़रूरी है के तुम अपने रिस्तेदारो से अच्छा बर्ताव करो. `` (11)-बगैर ज़रूरत के भीख मांगना नाजायज़ और हराम है. ...

अनमोल मोती

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-:: अनमोल मोती-4 ::- `` (1)- कामयाबी हासिल करने के लिए कोशिश करनी चाहिए, और कोशिश करते वक्त मकसद और मंज़िल नज़र मे होनी चाहिए. `` (2)- मन्जिल तक पहुँचने के लिए उम्मीद जरुरी है. और उम्मीद तब पूरी होती है जब नियत नेक हो. नेक नियत वाला कामयाब होता है. `` (3)-माँ की मेहरबानियाँ असमान के सितारों जितनी है. `` (4)-माँ-बाप की इताअत-(फ़रमाँबरदारी) से अल्लाह तआला राज़ी होता है. `` (5)-मेहनत करते रहो. मेहनत की बेशुमार बरकते है. मेहनत करने वाले का जिस्म तंदुरस्त, दिमाग साफ, दिल फ़ैयाज़ और जेब भरी रहती है. और लोग मेहनत करनेवाले की कदर करते है. अल्लाह तआला की नज़र मे महेनत भी इबादत है. `` (6)-आपस-आपस में इस तरह मिलो के दुबारा मिलने की तमन्ना पैदा हो. `` (7)-अकल्मन्द की सच्ची पहचान गुस्से की हालत मे होती है. `` (8)- इंसान जितनी मेहनत बुराई छुपाने मे करता है उतनी मेहनत करे तो बुराई से बच सकता है. `` (9)-एहसान इन्सान को एक दिन गुलाम बना देता है. `` (11)-गुनाह छोटा हो चाहे बड़ा किसी न किसी तरह गुनेहगार को बेचैन करता रहता है. `` (11)- यादें आसमान पर चमकने वाले ...

अनमोल मोती-3

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:: अनमोल मोती-3::- (1)-दुनिया की मिशाल समंदर जैसी है, उससे जितना पानी पिओगे प्यास उतनी ही ज़्यादा लगेगी. मगर प्यास मिटेगी नही.। `` (2)-जो तुम्हे तकलीफ-(दुःख) दे उसे छोड़ दो. मगर जिसे छोड़ दो उसे दुःख न दो, वार्ना तुम मे और उसमे क्या फर्क रहेगा? `` (3)-अपना राज़ अपने अलावा किसी पर ज़ाहिर न करो, क्योंकी हर राज़दार का एक राज़दार होता है. `` (4)- दौलत चूराई जा सकती है , मगर इल्म चुराया नहीं जा सकता। दौलत समय के साथ कम हो जाती है, मगर इल्म कभी कम नहीं होता `` (5)- ज़िंदगी की उलझने शररतो को काम कर देती है, मगर लोग समझते है के हम समझदार हो गये. `` (6)-जो तुम्हारी कद्र नहीं करता तुम उसकी और भी ज़्यादा कदर करो, क्योंकी ज़िन्दगी के किसी मोड़पर उसे तुम्हारी कद्र का एहसास ज़रूर होगा.। `` (7)- अल्लाह तआला को ज़ुबां और दिल का सख्त होना पसंद नहीं है. इसलिए इन दोनों को बगैर हड्डी के बनाया है. (8)-अगर तुम अपनी मुस्कुराहट के लिए अल्लाह तआला  का शुकरिया अदा नहीं कर शकते तो हमें कोई हक़ नहीं पहुँचता के हम अपने आँसु का कसूरवार अपने रब को ठहराये.। `` (9)- जिसके ज़ुबान दुरस्त ह...

अनमोल मोती – 2

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❁ -:अनमोल मोती – 2 `` (1)-सबसे ज्यादा कमज़ोर आदमी ओ है जो दोस्त को हासिल करने मे नाकाम हो, और उससे भी ज़्यादा कमज़ोर ओ शख्स है जो हाथ आये दोस्त को गवा दे। `` (2)-नेक काम और सदका गरीबी को दूर करता है और 70 किस्म की दर्दनाक मौत से महफ़ूज़ रखता है और उम्र मे इज़ाफ़ा करता है। `` (3)-जिसको खुद अपना ख्याल नहीं वह किसी और का ख्याल कैसे रख सकता है। `` (4)-अगर ज़िन्दगी खुशयों के साथ गुज़ारना चाहते हो तो ग़मज़दा लोगो के गम सुना करो, कभी दुखी नहीं रहोगे. ``  (5)-सरकार दो आलम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया के इंसान का बे-फायदा बातों को छोड़ देना उसके अच्छे मुस्लमान होने की दलील है.। `` (6)- दुनीयां की  ज़िनत…। मां, बीवी, औलाद, और दाना दोस्त। आखिरत की ज़िनत… इल्म, तक़वा और सदक़ा. और जिस्म की ज़िनत… कम खाना, कम सोना और कम बोलना…। ``  (7)-जो औलाद सुबह उठकर अपने  माँ-बाप को प्यार से सिर्फ देख ले तो उस दिन सुबह से शाम तक उसके लिए जन्नत के दो दरवाज़े खोल दिये  जाते है.। `` (8)-हर अच्छे काम के लिए सवाब का अंदाजा है, लकिन सब्र के सवाब का कोई अंदाज़ा नहीं. `` (9)-अल्लाह तआला दोस्त और दुश...

भलाई सिखाने वाले पर अल्लाह की रहमत,....

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☆भलाई सिखाने वाले पर अल्लाह की रहमत,.... Arzooemadina ♥हदीस : अबु उमामा बाहीली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है उन्होंने फरमाया की, रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम) के सामने दो (2) आदमीयों का चर्चा (जिक्र) किया गया, एक उनमे से इबादत करने वाला (आबीद) था और दुसरा आलीम, *तो रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम)  ने फरमाया की - "इबादत करने वाले पर आलीम की बढ़ाई ऐसी है जैसे की मेरी बढ़ाई तुम्हारे मामुली आदमी पर, *फिर रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम)  ने फरमाया की- "लोगो को भलाई सिखाने वाले पर अल्लाह तआला रहमत नाजील फरमाता है और उसके फरिश्ते और जमीन और आसमान मे रहने वाले यहां तक की चिटीयां अपनी बिलो मे और मछलियां पानी मे उसके लिए भलाई की दुआ करते है,.... 📚(तिर्मीजी शरिफ, - *_⚠नोट :- पोस्ट ज़रूर शेअर करें और हमेशा जारी रहने वाले सवाब ए जारीया के हक़दार बने,_* --------------------------------------------------

जब बन्दा सुरह फातिहा की तिलावत करता है ....

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☆जब बन्दा सुरह फातिहा की तिलावत करता है ..... - ♥हदीस : अबु हुरैरा (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) कहते है मैंने रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)  को फरमाते सुना, "अल्लाह फरमाता है मैंने नमाज अपने और अपने बन्दे के दरमियान आधी-आधी तकसीम करदी है, लिहाजा मेरा बन्दा जो सवाल करेगा उसे मिलेगा" - - जब बन्दा कहता है ( अल्हमदुलल्लिलाही-रब्बील-आलामीन) तो अल्लाह फरमाता है मेरे बन्दे ने मेरी तारिफ की - - जब बन्दा कहता है (अर्रहमान-निरर्रहीम) तो अल्लाह फरमाता है मेरे बन्दे ने मेरी सना कि - और एक मर्ताबा यु फरमाता है" बन्दे ने अपने काम मेरे सुपुर्द किया - - और जब बन्दा कहता है (मालीके-यौमीद्दीन) तो अल्लाह फरमाते है" मेरे बन्दे ने मेरी बुजुर्गी ब्यान की - - जब बन्दा कहता है (इय्याकाना'-बुदु-वाइय्याका-नस्ताय्यीन) तो अल्लाह फरमाता है ये मेरे और मेरे बन्दे के दरमियान मुआमला है और मेरा बन्दा जो मांगेगा उसे मिलेगा - - जब बन्दा कहता है (इहदेनस-सिरातल-मुस्ताकीम - सिरातल-लजीना-अन'अमता'आ'लैहीम-गैरिल-मगजुबी-अलैहीम-वलद्दालीन) तो अल्लाह फरमाता है...

7-तालिब ए इल्म के एहतेराम मे फरिश्ते परवाज़ रोककर खड़े हो जाते हैं और आलिम ए दीन के लिये तमाम मख़लूक मग़फिरत की दुआ करती है

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7-तालिब ए इल्म के एहतेराम मे फरिश्ते परवाज़ रोककर खड़े हो जाते हैं और आलिम ए दीन के लिये तमाम मख़लूक मग़फिरत की दुआ करती है ➡ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू कहते हैं के मैने  रसूलुल्लाह सल्ललाहू अलैहे वसल्लम को इरशाद फरमाते हुवे सुना, " जो शख्स इल्म हासिल करने के लिये किसी रास्ते पर चले तो उसकी वजह से अल्लाह तआला उसके लिये जन्नत का रास्ता आसान फरमा देंगे," और उसके अमल से खुश होकर फरिश्ते तालिब ए इल्म के लिये अपने परो को रख देते हैं (यानी परवाज़ रोककर खड़े हो जाते हैं) और आलिम के लिये आसमानों की तमाम मख़लूक और ज़मीन की तमाम मख़लूक दुआये मग़फिरत करती हैं हत्ता की मछलियां पानी मे, और आलिम की फज़ीलत आबिद पर ऐसी है जैसी चांद की फज़ीलत बाक़ी सितारों पर, और तहक़ीक़ उल्मा अंबिया के वारिस हैं और अंबिया अलैहिस्सलाम दिनार और दिरहम का किसी को वारिस नहीं बनाते, वो तो इल्म का वारिस बनाते हैं, लिहाजा जिसने इल्म हासिल किया उसने बहुत बड़ी खैर हासिल कर ली," *📘 तिरमिज़ी ,,2/93,*   *💕ʀєαd,ғσʟʟσɯ αɳd ғσʀɯαʀd💕*    ✧---------------------...

Farmane Mustafa

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NABI E KAREEM Sallallahu Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Ne Irshad Farmaya: "Aye logon..! Beshak baroz E Qayamat iski Dehshaton Aur Hisab Kitab Se jald Najat Paane Wale Shaqsh Wo honge Jisne Tum Me Se Mujh Par Duniya Ke Andar Ba Kasrat Dariodd Sharif Padhe Honge. " (Alfirdous bemasoor-ul-khataab/Vol:5/P.277/ Hadith No:8175) Farmane mustafa 

Kisi Takleef Ki Wajah

Kisi Takleef Ki Wajah Se Mout Ki Aarzu Na Kare 🌿 *********************** Huzoor ﷺ Ne Farmaya “Tum Me Se Koi Shakhs Kisi Takleef Ki Wajah Se Jo Mout Ki Aarzoo Na Kare Aor Agar (Takleef Ki Noeyat Aisi Ho Keh Iss Ke Bagair) Chaara Naa Ho To Iss Tarhan Dua Kare “Aye ALLAH ! Tu Mujhe Us Waqt Tak Zinda Rakh Jab Tak Zindagi Mere Liye Behtar Ho Aor Uss Waqt Mujhe Fout (De) Kar De Jab Wafaat Mere Liye Behtar Ho”. 📗– [(Reyaaz-Al-Saleheen) Jild No-1, Hadees No-40]