Posts

Showing posts with the label New post

हदीस सुनने का ज़ोको शौक और उसकी हिफ़ाज़त करने का रिक्कत अंगेज़ वाक्या

Image
(हदीस सुनने का ज़ोको शौक और उसकी हिफ़ाज़त करने का रिक्कत अंगेज़ वाक्या ) Arzooemadina.blogspot.in हजरत हाफिज़ निशापुरी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है कि हजरत अबु अय्युब अन्सारी रज़ियल्लाहु अन्हु ने हुजुर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैह व सल्लम से एक हदीस सुनी थी इत्तेफाक से उस हदीस को सुनने वाले मशहुर सहाबी हजरत उकबा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु भी थे  चुनांचे हुजुर के विसाल फरमाने के बाद इस्लाम कि फतुहात का सिलसिला वसिअ हुवा और शाम रुम इरान पर भी परचमे इस्लाम लहराया लिहाज़ा इन फतुहात मे बहुत से सहाबी इधर उधर सुकुनत पजिर हुवे चुनांचे हज़रत उकबा बिन आमिर मिस्र मे सुकुनत पजिर हो गये थे  इधर किसी तरह हजरत अबु अय्युब को ये खबर लगी कि जो हदीस उन्होने हुजुर अलैहीस्सलाम से सुन रखी है वही हदीस हजरत उकबा बिन आमिर ने भी सुन रखी है  चुनांचे हजरत अबु अय्युब को ये शौक ए इश्तियाक मदीने से मिस्र कि और ले चला ताकी वो उनसे हदीस सुनकर ये रिवायत कर सके कि इस हदीस को रिवायत करने वाले हम दौ शख्स है और हदीस कि सनद मजबुत हो जाए  लिहाज़ा कमज़ोरी व ज़ ईफि कि हालत मे निकल पङ...

नौजवानों के लिए सबक़ आमोज़ वाक़िआ

Image
#नौजवानों_के_लिए_सबक़_आमोज़_वाक़िआ*                             #इश्क़ Arzooemadina.blogspot.in बनी इस्राईल का एक क़स्साब (क़साई) अपने पड़ोसी की कनीज़ पर आशिक़ हो गया- इत्तिफाक़ से एक दिन कनीज़ को उसके मालिक ने दूसरे गांव किसी काम से भेजा- क़स्साब को मौक़ा मिल गया और वो भी उस कनीज़ के पीछे हो लिया- जब वो जंगल से गुज़री तो अचानक क़स्साब ने सामने आकर उसे पकड़ लिया और उसे गुनाह पर आमादा करने लगा- जब उस कनीज़ ने देखा कि उस क़स्साब की नियत खराब है तो उसने कहा:            "अय नौजवान तू इस गुनाह में ना पड़ ! हक़ीक़त ये है कि जितना तू मुझसे मुहब्बत करता है उससे कहीं ज़्यादा मैं तेरी मुहब्बत में गिरफ्तार हूं लेकिन मुझे अपने मालिके हक़ीक़ी عز وجل का खौफ इस गुनाह के इर्तिकाब से रोक रहा है.!" उस नेक सीरत और खौफे खुदा रखने वाली कनीज़ की ज़बान से निकले हुए ये अल्फाज़ तासीर का तीर बनकर उस क़स्साब के दिल में पैवस्त हो गए और उसने कहा:            ...

फैज़ाने फ़ारुके आज़म``(पोस्ट-03)

Image
``फैज़ाने फ़ारुके आज़म``(पोस्ट-03) --- ☆फ़ारुके आज़म  हुस्ने ज़ाहिरी.... -- ❀फ़ारुके आज़म की मुबारक रंगत❀ -- ♥हज़रते इब्ने कुतैबा रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है की "कूफा के लोगो ने अमीरुल मुअमिनिन हज़रते उमर फ़ारुके आज़मرضي الله تعالي عنه का जो हुल्या बयान किया है उस के मुताबिक़ आप का रंग गहरा गन्दुमी था। जब की अहले हिजाज़ ने जो आप का हुल्या बयान किया है उसके मुताबिक़ आप की रंगत बहुत सफेद थी बल्कि ऐसी सफेद थी जेसे चुना होता है और लगता था की आप के जिसमे मुबारक में खून ही नही है। •अल्लामा वाकिदि अलैरहमा फरमाते है  की जिन्होंने आपرضي الله تعالي عنه के गन्दुमी रंग होने का क़ौल किया है उन की बात दुरुस्त नही की उन्हों ने आप को "आमुर्रमादा" यानी कहत साली वाले साल देखा था। आप ने उस साल दूध और चर्बी वगैरा खाना छोड़ दिया था सिर्फ ज़ैतून का तेल इस्तिमाल फरमाते जिस के सबब आप की रंगत गन्दुमी हो गई थी। अल्लामा इब्ने हजर असक्लानि अलैरहमा ने भी बाज़ फारुकी हज़रात से यही क़ौल नक़ल किया है। ☆फ़ारुके आज़म का क़दे मुबारक ✦हज़रते ज़र बिन हुबैश और अक्सर लोगो ने यही बयान किया है की अमीरुल मुअमिनिन...

फैज़ाने फ़ारुके आज़म``(पोस्ट-02)

Image
`फैज़ाने फ़ारुके आज़म``(पोस्ट-02) ` ☆फ़ारुके आज़म की पैदाइश और जाए परवरिश... ` ✦फ़ारुके आज़म की पैदाइश✦ ` ♥आपرضي الله تعالي عنه आमूल फिल के 13 साल बाद पैदा हुवे, यु आप की तारीखे विलादत 583 ईस्वी तक़रीबन 41 साल क़ब्ले हिजरत है। हज़रते सिद्दीके अकबरرضي الله تعالي عنه आमूल फिल के ढाई साल बाद पैदा हुवे यु आप सिद्दीके अकबरرضي الله تعالي عنه से उम्र में तक़रीबन साढ़े दस साल छोटे है और सरकारे मदीनाﷺ चुकी आमूल फिल के साल दुन्या में तशरीफ़ लाए यु आपرضي الله تعالي عنه हुज़ूरﷺ से उम्र में तक़रीबन 13 साल छोटे है। `` ••फ़ारुके आज़म की जाए परवरिश•• ` ♥आपرضي الله تعالي عنه मक्का में ही पैदा हुवे और मक्का ही आप की जाए परवरिश है, बचपन से ले कर जवानी तक, नीज़ मदीना हिजरत से क़ब्ल तक आप ने मक्का में ही ज़िन्दगी गुज़ारी। ☆दौरे जाहिलिय्यत में फ़ारुके आज़म का घर... ``  ♥हज़रते अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद बिन साद ने उमुरे मक्का के आलिम हज़रते अबू बक्र बिन मुहम्मद मक्कीرضي الله تعالي عنه से पूछा : ज़मानए जाहिलिय्यत में आप का घर कहा था ? फ़रमाया : फ़ारुके आज़मرضي الله تعالي عنه की रिहाइश गाह उस पहाड़ पर थ...

फैज़ाने फ़ारुके आज़म र०अ०

Image
``फैज़ाने फ़ारुके आज़म``(पोस्ट-01) ` ☆फ़ारुके आज़म का नामें नामी इसमें गिरामी.. ` ♥दौरे जाहिलिय्यत के दौरे इस्लाम में आपرضي الله تعالي عنه का नाम "उमर" ही रहा। उमर के माना है "आबाद रखने वाला" या "आबाद करने वाला"। हज़रते उमरرضي الله تعالي عنه के सबब चुकी इस्लाम आबाद होना था इस लिये अल्लाह ने पहले ही आप को "उमर" नाम अता फरमा दिया और इस्लाम आप के सबब आबाद हुआ लिहाज़ा आप इसमें बा मुसम्मा है। ` •इंसानी ज़िन्दगी की मुद्दत को भी उम्र कहते है यानी जिस्म की आबादी का ज़माना। फ़ारुके आज़मرضي الله تعالي عنه का अहदे खिलाफत चुकी इस्लाम की आबादी का ज़माना है इस ऐतिबार से भी आपرضي الله تعالي عنه इसमें बा मुसम्मा हुवे। ✦आसमानों, इंजील, तौरेत और जन्नत में आप का नाम.... मरवी है की अमीरुल मोमिनीन हज़रते उमर फ़ारुके आज़मرضي الله تعالي عنه का नाम आसमानों में "फारूक़" इंजील में "काफी" तौरात में "मन्तकुल हक़" और जन्नत में "सिराज" है। ☆बारगाहे रिसालत से अताकर्दा नाम...!! `  ♥हज़रते आइशा सिद्दीक़ाرضي الله تعالي عنها स...

जब बन्दा सुरह फातिहा की तिलावत करता है ....

Image
☆जब बन्दा सुरह फातिहा की तिलावत करता है ..... - ♥हदीस : अबु हुरैरा (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) कहते है मैंने रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)  को फरमाते सुना, "अल्लाह फरमाता है मैंने नमाज अपने और अपने बन्दे के दरमियान आधी-आधी तकसीम करदी है, लिहाजा मेरा बन्दा जो सवाल करेगा उसे मिलेगा" - - जब बन्दा कहता है ( अल्हमदुलल्लिलाही-रब्बील-आलामीन) तो अल्लाह फरमाता है मेरे बन्दे ने मेरी तारिफ की - - जब बन्दा कहता है (अर्रहमान-निरर्रहीम) तो अल्लाह फरमाता है मेरे बन्दे ने मेरी सना कि - और एक मर्ताबा यु फरमाता है" बन्दे ने अपने काम मेरे सुपुर्द किया - - और जब बन्दा कहता है (मालीके-यौमीद्दीन) तो अल्लाह फरमाते है" मेरे बन्दे ने मेरी बुजुर्गी ब्यान की - - जब बन्दा कहता है (इय्याकाना'-बुदु-वाइय्याका-नस्ताय्यीन) तो अल्लाह फरमाता है ये मेरे और मेरे बन्दे के दरमियान मुआमला है और मेरा बन्दा जो मांगेगा उसे मिलेगा - - जब बन्दा कहता है (इहदेनस-सिरातल-मुस्ताकीम - सिरातल-लजीना-अन'अमता'आ'लैहीम-गैरिल-मगजुबी-अलैहीम-वलद्दालीन) तो अल्लाह फरमाता है...

Hadish

ﺴَـــــــﻼَﻡُﻋَﻠَﻴــْــﻜُﻢ ﻭَﺭَﺣْﻤَﺔُ ﺍﻟﻠﻪِ ﻭَﺑَﺮَﻛـَـﺎﺗُﻪ.As-Salamu-A'alaikum Wa-Rahmatullahi-Wabarakatuhu.↴Translation Aur Aap pr ) bhi ( Salamati ho or ALLAH ki RAHMAT or unky BARKATEIN hon.------------------------------------------------------------------------Ek Hadith ka Mhefum SAHABIO ny pucha Husn-E-Akhlaq Kya he, Aap Sallallahu-A'alaihi-Wa-Sallam ny farmaya 1( Jo Tujh Se Rishta Torey, Tu Uss Se Rishta Jor 2( Jo Tera HAQ Maare, Tu Uss Ko Ata Kar )Zyada De( 3( Jo Tujh Par ZULM Kare, Tu Uss Ko Maaf Kar 4( Jo Tujh Se Bura Sulook Kare, Tu Uss Ke Sath Accha Sulook Kar".....

Kamao zarur gawao mat

Kuch log ayese hote hai jo kamne, mehnatmazduri karne se ji churate hai lekin kharch karne mai bade hi tez hote hai. Ayese log apni nahi balki parayi kamayi par Ayesha karna pasand karte hai. Aur kuch log ayese bhi hote hai jo badi mehenat-mashkkat aur lagan se kamate hai lekin apni kamayi ko sabhal kar nahi rakhte balki badi bedardi se khun-pasine ki kamayi ko pani ki tarah baha dete hai.Jabki samjhdari ka takaza to yaha hai ki lagan aur mehenat s halal tarike se kamaye, jayez aur jarori kamo mai kharch kare aur kal ke liye bhi kuch bach kar arkhe taki jarurat padne par kisi ke samne hath failane ki sharmnaak nawbat na aye. Islam ne musalmano ko dene ki talim di hai aru bila jarorat mangne, sawal karne se shakhti se mana kiya hai.Bilkul yahi haal hai dini mamlat ka bhi. Ham apna farz ada karne ki har mumkin koshish kare taki akhirat ki pakad se bach sake aur is ke sath yah bhi jarori hai ki ham apne amal mai khulus payeda kare. Ibadat, riyazat, haj wa jakat, sadka-khayratwagaira jaye...