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ANDHA PARINDA

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Sachhi Hiqayat Hazrat Anas Razi-Allahu-Anhu Farmate Hain Ki, Ek Din Huzoor SALLALLAHU-ALAIHI-WA AALIHI WA SALLAM  Ke Saath Ek Jungle Me Tha Ki Aapne Ek Andhe Parinde Ko Ek Daraqt Par Thonge Maarte Hue Dekha Aur Mujhse Farmaya, Aye Anas..! Jaante Ho Ye Parinda Kya Keh Raha Hain? Maine Arz Kiya, ALLAH Jaane Ya Uska Rasool..! Huzoor Ne Farmaya, Ye Keh Raha Hain, ILAAHI ! Tune Mujhe Andha Bhi Kiya Aur Bhooka Bhi..! Itne Me Ek Tiddi Udhti Hui Aayi Aur Uske Munh Me Aakar Giri..! Us Parinde Ne Use Kha Liya..! Wo Parinda Phir Thonge Maarne Laga..! Huzoor Ne Farmaya, Aye Anas..! Jaante Ho Ki Abb Wo Kya Keh Raha Hain? Maine Arz Kiya Ki Huzoor Aap Hi Jaane..! Huzoor Ne Farmaya, Aye Anas..! Abb Ye Keh Raha Hain Ki Jisne ALLAH Par Tawakkul Kiya ALLAH Uska Kaam Pura Kardeta Hain..! (Nujjahtul Majalis/Jild:01/Page:442) ********* SABAQ: ** ALLAH-TA'AALA Par Tawakkul (Bharosa, Ummid) Rakhne Se Saare Kaam Pure Hojate Hain..! ********

हजरते उसमान गन रजी अल्लाहु अन्हु सखावत के धनी

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•हजरते  उसमान गन रजी अल्लाहु अन्हु  सखावत के धनी•••✍ ¤───────♤───────¤ 📃जंगे तबुक के मौके पर हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मुस्लमानो को अल्लाह की राह मे खर्च करने की तरगीब दे रहे थे। की हजरत उसमान (रजी अल्लाहु अन्हु) उठे और अर्ज किया या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) साज व समान समेत एक सौ ऊंट देता हुं। 📃हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फिर तरगीब दी तो हजरत उसमान रजी अल्लाहु अन्हु  ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! साज व समान के साथ दो सौ ऊंट देता हुं।हुजुर ने फिर फरमाया तरगीब दी तो हजरत उसमान रजी अल्लाहु अन्हु  ने फिर अर्ज किया हुजुर साज व समान के साथ तीन सौ ऊंट मै देता हुं। 📃फिर उन तीन सौ ऊंटो के अलावा हजरत उसमान रजी अल्लाहु अन्हु ने एक हजार दिनार भी हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के सामने पेश कर दिये। 📃हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने हजरत उसमान रजी अल्लाहु अन्हु यह सखावत देखी तो हजरत उसमान रजी अल्लाहु अन्हु के पेश किये गये दिनारो मे अपना हाथ मुबारक डालकर फरमाया  उसमान रजी अल्लाहु अन्हु के इस नेक अमल के बाद अब उसे कोइ बात नुक्सान न देग...

DUNIYA KI HAQIQAT

📚 Hadees: Rasoolullah ﷺ ne irshaad farmaaya: Allah ki Qasam! Duniya Aakhirat ke muqabley me itni si hai, ke tum me se koi apni ungali samandar me daaley phir nikaaley aur dekhey ke us ungali par kitna paani laga hai.    - 📔 [Sahi Muslim: 7197]

नमाज का तरीका

*नमाज़ का तरीका*        ( Part 15)      🌷फिर 4 रकअते पूरी करके कादए आखिरह में तशह्हुद के बाद दुरुदे इब्राहिम पढ़िये, फिर दुआए मासुरा पढ़िये     🌹 फिर नमाज़ खत्म करने के लिये पहले दाए कन्धे की तरफ मुह कर के "अस्सलामु अलैक वरहमतुल्लाह" कहिये और इसी तरह बाई तरफ। अब नमाज़ खत्म हुई।      🌸इस्लामी भइयो और बहनो के दिये हुए इस तरीकए नमाज़ में बाज़ बाते फ़र्ज़ है की इसके बगैर नमाज़ होगी ही नही,            🌸बाज़ बाते वाजिब की इस का जानबूझ कर छोड़ना गुनाह और तौबा करना और नमाज़ का फिर से पढ़ना वाजिब, और भूल कर छूटने से सज्दए सहव वाजिब      🌷और बाज़ सुन्नते मुअक्कदा है की जिस के छोड़ने की आदत बना लेना गुनाह है और      बाज़ मुस्तहब है की जिस का करना सवाब और न करना गुनाह नही। *✍🏼बहारे शरीअत, ही.3 स.66* *✍🏼नमाज़ का तरीका*

नमाज का तरीका

 नमाज़ का तरीका     ( Part 14)      क़ादह में तशह्हुद में "अशहदू अंल्ला-इलाह" के लाम के करीब पहुचे तो सीधे हाथ की बिच की ऊँगली और अंगूठे का हल्का बना लीजिये और छुंगलिया (छोटी ऊँगली) और बिन्सर यानि उसके बराबर वाली ऊँगली को हथेली से मिला दीजिये और कलिमे की ऊँगली उठाइये।      मगर इसको इधर उधर मत हिलाये और "इला" पर ऊँगली गिरा दीजिये और फौरन सब उंगलिया सीधी कर लीजिये।      अब अगर दो से ज्यादा रकअते पढ़नी है तो "अल्लाहु अकबर" कहते हुए खड़े हो जाइये।      अगर फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहे है तो तीसरी और चौथी रकअत में क़याम में "बिस्मिल्लाह और अल्हम्दु शरीफ पढ़िये, सूरत मिलाने की ज़रूरत नहीं। बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله  ✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 152-153

नमाज का तरीका

 नमाज़ का तरीक़ा       (Part 13)      दूसरे सज्दे से खड़े होते हुए पहले सर उठाइए फिर हाथो को घुटनो पर रख कर पन्जो के बल खड़े हो जाइये।उठते वक़्त बिगैर मजबूरी ज़मीन पर हाथ से टेक मत लगाइये।      ये आप की एक रकअत पूरी हुई।      अब दूसरी रकअत में "बिस्मिल्लाह" पढ़ कर अल हम्द और सूरह पढ़िये और पहले की तरह रुकूअ और सज्दे कीजिये,  मर्द :*      दूसरे सज्दे से सर उठाने के बाद सीधा क़दम खड़ा कर के उल्टा क़दम बिछा कर बैठ जाइये  औरत :*      दूसरे सज्दे से सर उठाने के बाद दोनों पाउ सीधी तरफ निकाल दीजिये और उल्टी सुरीन पर बैठिये और सीधा हाथ सीधी रान के बिच में और उल्टा हाथ उल्टी रान के बिच में रखिये।      दो रकअत के दूसरे सज्दे के बाद बैठना कादह कहलाता है, अब कादह में तशह्हुद (अत्तहिय्यात) पढ़िये। बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله  ✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 151-152

जवानी कैसे गुजारे

 जवानी कैसे गुज़ारे ?      (Part 07)  ❤ बे वक़्ते रिहलत हज़रत अमीरे मुआविया का फरमान      हज़रते अमीरे मुआविया رضي الله عنه का जब वक़्ते विसाल क़रीब आया, तो आप ने फ़रमाया : मुझे बिठाओ। जब बिठाया गया तो आप ज़िकरुल्लाह और तस्बीह में मश्गुल हो गए। फिर रोते हुए अपने आप को मुखातब कर के (बतौरे आजिज़ी) फरमाने लगे : ऐ मुआविया ! अब बुढ़ापे और कमज़ोरी के वक़्त अल्लाह का ज़िक्र याद आया, उस वक़्त क्या था जब जवानी की शाख तरो ताज़ा थी।  बुज़ुर्गो की आजिज़ी हमारे लिये रहनुमाई     ❤  हमारे अस्लाफे किराम किस क़दर नेकियों के क़द्रदान और आजिज़ी के पैकर थे कि महबूबे रब्बे अकबर ﷺ के जलिलुल क़द्र सहाबी होने और सारी ज़िन्दगी नेकियों में बसर करने के बा वुजूद हसरत है कि काश ! कसरते इबादतों रियाज़त की मज़ीद सआदत नसीब हो जाती, आप رضي الله عنه की इस आजिज़ी में हमारे लिये रहनुमाई है कि ऐ जवानो ! जवानी बहुत बड़ी नेअमत है, इस की क़द्र करो, इसे फुज़ूलियत में मत गुज़ारो वरना जब होश आएगा तो उस वक़्त तीर कमान से निकल चुका होगा और कमान से निकले तीर वापस नहीं आया करते।  ✍🏼...